India’s Firm Stand
India’s Firm Stand: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को अनुचित और बेवजह बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस विवाद पर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ न केवल अनुचित हैं, बल्कि पूरी तरह से बेबुनियाद भी हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसमें से आधा पहले ही लागू हो चुका है और शेष जल्द लागू होने वाला है।
अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से तेल और ऊर्जा की खरीद जारी रखे हुए है। लेकिन जयशंकर ने इसे “गलत प्रस्तुति” करार देते हुए साफ कहा कि भारत के ऊर्जा और व्यापार संबंधी फैसले उसकी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और आर्थिक सुरक्षा पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, “भारत अपने किसानों, छोटे उत्पादकों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं है।”
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और “दोहरे मापदंड” का सवाल
जयशंकर ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जब यूरोप और चीन रूस के साथ कहीं अधिक बड़े पैमाने पर व्यापार करते हैं, तो केवल भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उनका यह बयान केवल अमेरिका को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को संकेत देता है कि भारत दोहरे मानकों को स्वीकार नहीं करेगा। यहां भारत का रुख महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल अमेरिका बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को भी चुनौती देता है। भारत यह संदेश दे रहा है कि वह अब केवल एक “उभरती हुई अर्थव्यवस्था” नहीं, बल्कि एक रणनीतिक शक्ति है, जो अपने फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकती है।
भारत की विदेश नीति का नया आयाम
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद भारत की विदेश नीति में एक निर्णायक मोड़ है। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज तक भारत ने हमेशा “रणनीतिक संतुलन” बनाए रखने की कोशिश की है। हाल ही में डॉ. जयशंकर की रूस यात्रा, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की, इसी संतुलन की झलक है। भारत एक ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर रूस और अन्य एशियाई देशों के साथ अपने ऐतिहासिक व आर्थिक संबंधों को भी कमजोर नहीं करना चाहता।
भारत-पाकिस्तान संदर्भ में स्पष्ट संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में भूमिका निभाई। इस पर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत पिछले पाँच दशकों से किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता और यह नीति आगे भी अटूट रहेगी। यह बयान केवल पाकिस्तान को नहीं, बल्कि अमेरिका को भी संकेत है कि भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं होगा।
वैश्विक राजनीति पर असर
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का यह रुख एक तरह से वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका की “इंडो-पैसिफिक रणनीति” में भारत की भूमिका अहम है। ऐसे में यदि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति पर भी असर डालेगा। इसके साथ ही, भारत का यह संदेश भी स्पष्ट है कि वह बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला देश नहीं है। आने वाले समय में यह रुख भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक सम्मान दिला सकता है।
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