Shaheen Shahid
Lucknow Doctor Linked to Faridabad Terror Module Exposed: फरीदाबाद में विस्फोटक मिलने के बाद शुरू हुई जांच ने लखनऊ की एक डॉक्टर तक पहुंच कर बड़ा खुलासा किया — जैश-ए-मोहम्मद की महिला इकाई “जमात उल-मोमिनात” भारत में महिलाओं की आतंकी भर्ती के लिए सक्रिय थी।
फरीदाबाद की शांत सुबह ने जब विस्फोटकों की गंध महसूस की, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह मामला सीधे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद तक पहुंच जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, परत दर परत खुलती चली गई — और सामने आई एक महिला डॉक्टर, शाहीन शाहिद, जिसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। शाहीन शाहिद, लखनऊ के लालबाग की रहने वाली और कथित तौर पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी एक डॉक्टर, अब जांच एजेंसियों के निशाने पर है।
फरीदाबाद में 2,900 किलो विस्फोटक मिलने के बाद जब पुलिस ने सूत्रों के धागे जोड़े, तो धौज (फरीदाबाद) से गिरफ्तार कश्मीरी डॉक्टर मुज़म्मिल गनई उर्फ मुसैब तक पहुंची — और फिर वही धागा लखनऊ तक जा पहुंचा, शाहीन शाहिद तक। जांच में सामने आया कि शाहीन की कार — एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट (HR-51) — से एके-47 रायफल, पिस्तौल और गोला-बारूद बरामद हुए। यह वही वाहन था जिसमें फरीदाबाद के किराए के कमरे से विस्फोटक सामग्री लाने-लेजाने का संदेह है।
लेकिन शाहीन महज़ एक सहयोगी नहीं थी। सूत्रों के अनुसार, वह भारत में महिलाओं की आतंकी भर्ती अभियान की जिम्मेदारी संभाल रही थी। बताया जा रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद ने हाल ही में पाकिस्तान के बहावलपुर में महिलाओं के लिए एक विशेष शाखा बनाई है — “जमात उल-मोमिनात” — जिसका नेतृत्व मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर कर रही है। यही वह संगठन है, जिसके जरिए शाहीन शाहिद को भारत में महिला आतंकियों का नेटवर्क खड़ा करने का काम सौंपा गया था।
सादिया अजहर के पति यूसुफ अजहर, जो कंधार विमान अपहरण कांड में शामिल था, भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। माना जा रहा है कि उसके बाद से सादिया ने जैश की महिला इकाई की बागडोर संभाली और शाहीन को भारत में उसकी पहली प्रतिनिधि बनाया। फरीदाबाद पुलिस, दिल्ली स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो की संयुक्त जांच अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे बड़े आतंकी मॉड्यूल का पता लगाने में जुटी है। शाहीन और मुज़म्मिल दोनों के मोबाइल, लैपटॉप और ऑनलाइन चैट रिकॉर्ड से पता चला है कि इनका संपर्क पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से एन्क्रिप्टेड एप्स के ज़रिए हो रहा था।
यह खुलासा सिर्फ एक गिरफ्तारी या एक कार से मिले हथियारों का मामला नहीं है — यह भारत में महिलाओं के माध्यम से फैलाए जा रहे नए आतंकी नेटवर्क की झलक है। जहां आतंक के पर्दे के पीछे एक नया चेहरा सामने आ रहा है — शिक्षित, आधुनिक दिखने वाला, लेकिन भीतर से जहरीली विचारधारा से भरा हुआ। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि शाहीन शाहिद जैसी महिलाएं कैसे “डॉक्टर से जिहादी” बनती हैं, और उनके पीछे कौन-से प्रचारतंत्र काम कर रहे हैं जो उन्हें “सेवा” से “संघर्ष” के नाम पर हिंसा की राह पर धकेल रहे हैं।
फरीदाबाद से लेकर लखनऊ और कश्मीर तक फैले इस नेटवर्क ने साफ कर दिया है कि आतंक अब सीमाओं से नहीं, विचारों के ज़हर से फैलता है। और इस ज़हर का सबसे खतरनाक रूप तब होता है, जब वह मासूम चेहरों की आड़ में छिपा हो।
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