Indian Rupee Hits Record Low Despite Weak US Dollar
Indian Rupee Hits Record Low Despite Weak US Dollar: भारतीय रुपया 88.80 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी डॉलर वैश्विक स्तर पर कमजोर हो रहा है। अमेरिकी टैरिफ, H-1B वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
भारतीय रुपया इस समय अपने अब तक के सबसे निचले स्तरों के पास कारोबार कर रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर लगातार कमजोर हो रहा है। सामान्य परिस्थितियों में डॉलर की गिरावट उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को राहत देती है, लेकिन मौजूदा हालात बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। बुधवार को रुपया 88.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, दिन में यह 88.80 तक फिसल गया। इससे एक दिन पहले मंगलवार को यह 88.73 पर बंद हुआ था, जो अब तक का सबसे निचला समापन स्तर है। लगातार दबाव ने विदेशी मुद्रा बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है।
वैश्विक डॉलर की कमजोरी और उलटी दिशा में रुपया
डॉलर इंडेक्स (DXY), जो अमेरिकी मुद्रा को छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मापता है, 2025 में अब तक 11.3% और केवल अप्रैल से 7% तक गिर चुका है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धीमी वृद्धि, बढ़ता राजकोषीय घाटा और फेडरल रिज़र्व की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदें इस गिरावट की बड़ी वजह हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल डॉलर की कमजोरी जारी रह सकती है, लेकिन भारत में रुपया इसके विपरीत दिशा में बढ़ती गिरावट दिखा रहा है।
अमेरिकी नीतियों का असर
हाल ही में अमेरिका द्वारा लिए गए दो फैसलों ने भारतीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ा दी है। पहला तो था भारतीय निर्यात पर अधिक टैरिफ। इससे भारत की प्रतिस्पर्धा और व्यापार संतुलन को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। दूसरा है H-1B वीज़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी। इससे अब नए आवेदन पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगेगा। यह बदलाव सीधे तौर पर भारत की आईटी कंपनियों को प्रभावित करेगा, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी परियोजनाओं पर निर्भर है। इसके अलावा, वीज़ा चयन प्रक्रिया में उच्च वेतन और विशेषज्ञता वाले आवेदकों को प्राथमिकता देने की घोषणा भी की गई है। चूंकि पिछले वर्ष 71% H-1B लाभार्थी भारतीय थे, इसलिए यह बदलाव भारत की आईटी इंडस्ट्री पर गहरा असर डाल सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं। 23 सितंबर को एफपीआई ने भारतीय शेयरों में ₹3,551.19 करोड़ (लगभग $399.9 मिलियन) की बिकवाली की। यह सितंबर का सबसे बड़ा एकदिनी आंकड़ा था। सितंबर महीने में अब तक कुल $1 अरब की निकासी हो चुकी है। वहीं साल 2025 की शुरुआत से अब तक लगभग $16 अरब का विदेशी पूंजी प्रवाह बाहर जा चुका है।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी नीतिगत बदलाव, विदेशी निवेशकों की निकासी और घरेलू आर्थिक दबाव, रुपया पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। आरबीआई द्वारा हस्तक्षेप के बावजूद मुद्रा बाज़ार में स्थिरता फिलहाल दूर की बात लग रही है।
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