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India-Russia Trade: भारत-रूस व्यापार 2021 में 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 68 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। लेकिन असंतुलन 58.9 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा में व्यापार संतुलन, ‘मेक इन इंडिया’ अवसरों और रूसी सहयोग पर चर्चा।
जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ और रूस से तेल आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का दबाव बनाया, तो उन्हें यह उम्मीद थी कि भारत पीछे हट जाएगा और मास्को से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा। लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित किसी बाहरी दबाव से तय नहीं होंगे।
इसी पृष्ठभूमि में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मॉस्को पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इसके पहले वे रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव से मिले और भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) को संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि यह दौरा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उच्चस्तरीय रूस यात्रा के महज दो सप्ताह बाद हो रहा है, जो द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
व्यापार में असंतुलन का सवाल
जयशंकर ने आयोग की बैठक में भारत-रूस व्यापार में असंतुलन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में दोनों देशों का आपसी व्यापार पाँच गुना से अधिक बढ़कर 2021 में 13 अरब डॉलर से 2024-25 में 68 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। हालांकि, इसी अवधि में व्यापार असंतुलन 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 58.9 अरब डॉलर हो गया है। उन्होंने इस चुनौती के समाधान के लिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरक प्रकृति पर ज़ोर दिया और कहा कि ऊर्जा और कच्चे माल से परे जाकर भारतीय निर्यात को बढ़ावा देना और व्यापार को विविधतापूर्ण बनाना ज़रूरी है।
भारतीय अवसर और रूसी सहभागिता
जयशंकर ने रूसी कंपनियों को भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, “4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की जीडीपी और सात प्रतिशत की अनुमानित विकास दर वाला भारत स्वाभाविक रूप से विश्वसनीय स्रोतों से संसाधनों की बड़ी मांग रखता है। उर्वरक, रसायन, मशीनरी और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं।” ‘मेक इन इंडिया’ और भारत के शहरीकरण व आधुनिकीकरण जैसे अभियानों ने विदेशी निवेशकों के लिए नए द्वार खोले हैं। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि अब समय है कि रूसी कंपनियाँ भी भारतीय साझेदारों के साथ गहन जुड़ाव करें।
स्थायी संबंध, नई चुनौतियाँ भारत और रूस दशकों से एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग ने इस रिश्ते को मज़बूती दी है। लेकिन वर्तमान समय की चुनौती यह है कि व्यापार केवल तेल और कच्चे माल तक सीमित न रहकर व्यापक क्षेत्रों में फैले। जयशंकर का संदेश साफ था — यह रिश्ता जितना पुराना है, उतना ही प्रासंगिक भी। अब ज़रूरत है “अधिक मेहनत और रणनीतिक प्रयासों” की, ताकि व्यापारिक असंतुलन को कम किया जा सके और दोनों देशों की साझेदारी वास्तव में संतुलित और स्थायी बन सके।
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